एकटा लोरी : सूति रहू सोना बौआ

 
घर पछुबारमे छै हौआ..., सूति रहू सोना बौआ
कुतबा कोना झाँउ - झाँउ करै, देखू हे यै मैंया
लगैए करिया रातिमे कम्बल, ओढ़िक' एलै भोकैंया
नुका गेलै सभटा कौआ..., सूति रहू सोना बौआ
दूध मलीदा खाक' सुग्गा, चुप्पेसँ सूति जेतै
सपनामे फेर तोड़ि तरेगण, अंगनामे छिरियेतै
भगजोगनी छै चमकौआ..., सूति रहू सोना बौआ
भाग रे बूइया, भाग एतयसँ, सूति गेलै हमर सोना
भोरे हँसैत-खेलैत उठतै, कीनतै नबका खेलौना
दुनू हाथमे देब ढौआ..., सूति रहू सोना बौआ
◼️◼️◼️

टिप्पणियाँ

लोकप्रिय पोस्ट