गजल : चान एकटा तरहथ्थीपर पारि लेबै हमहूं
धाह सुरूजक हियमे उतारि लेबै हमहूं
चान एकटा तरहथ्थी पर पारि लेबै हमहूं
मिझा देल नोर ई सेहन्ता त' की भेल
ठोर मुसकी स' लुत्ती पजारि लेबै हमहूं
खखरी छी खखरी फराक भेलौ तें ने
अपना स' अपने परतारि लेबै हमहूं
डेग जे उठल छै से रूकतै नै कहियो
मेहनति स' सफलता उचारि लेबै हमहूं
हर्ष चरि रहलैए विकास बनल घोड़ा
चास कोना बांचत विचारि लेबै हमहूं
आसन करेजमे जमा ज' ओ बैसत
अधरतियामे चुप्पे दुलारि लेबै हमहूं
चान एकटा तरहथ्थी पर पारि लेबै हमहूं
मिझा देल नोर ई सेहन्ता त' की भेल
ठोर मुसकी स' लुत्ती पजारि लेबै हमहूं
खखरी छी खखरी फराक भेलौ तें ने
अपना स' अपने परतारि लेबै हमहूं
डेग जे उठल छै से रूकतै नै कहियो
मेहनति स' सफलता उचारि लेबै हमहूं
हर्ष चरि रहलैए विकास बनल घोड़ा
चास कोना बांचत विचारि लेबै हमहूं
आसन करेजमे जमा ज' ओ बैसत
अधरतियामे चुप्पे दुलारि लेबै हमहूं


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