पोथी पाठकीय : सत्यचित वेदनाक संग्रह थिक 'मणिकर्णिका'
'मणिकर्णिका'. हमरा जनैत ई शब्दे एकटा काव्य थिक, महाकाव्य. एहनामे जखन
यैह नाओक मैथिली कविता संग्रह हाथ अबैत अछि, त' ओकरा बिनु पढ़ने कोना रहल
जा सकैए. से एखनहि कवियित्री निवेदिता मिश्रा झा जीक टटका कविता संग्रह
'मणिकर्णिका' अद्योपांत पढ़ि सम्पन्न कयल अछि. ई पोथी पछिला मास दिल्ली
यात्राक क्रममे लेखिका उपहार स्वरूप देने छलि. 'मणिकर्णिका' हिनक तेसर
मैथिली काव्य संकलन थिक आ समवेतमे कहल जाए त' ई संग्रह नारी चेतनाक स्वर
थिक.
असलमे कविता मानवीय संवेदनाक सार्थक चित्रण अछि, आ से निवेदिता
जीक संग्रह पढ़लाक पछाति बेकछाइतो अछि. ई कवियित्री बिनु कोनो लाइ-लपेटक
मुक्तछंद कविताक परंपरागत शिल्पक सहारे पाठक हृदय छूबाक सफल प्रयास करैत
छथि, आ यैह हिनक विशिष्टता अछि. हिनक कवितामे नारी जीवनक विभिन्न रंग भकरार
भ' सोझा त' अएले अछि, संगहि समाज, संस्कृति, जिनगीक सौंदर्य आ प्रकृतिसँ
प्रेमक विविध रूपकेर दुरूह अनुभव सेहो फरिच्छ भेल अछि.
निवेदिता जीक
कविता सभमे सत्यचित वेदना सहजहि अकानल जा सकैए. मूलमे हिनक कविता, जिनगीक
झंझावत माझ औनाइत संवेदनाक स्फुटनकेर प्रमाण प्रस्तुत करैत भेटैत अछि. ई
अपन संग्रहमे मनुष्यक संवेदनहीनतापर सेहो अत्यंत मेंही ढ़ंगसँ प्रहार केलि
अछि. बानगी देखू-
'बोनक ई आगि
महादेशक मोनक आगि थिक,
लगैत अछि
सभ कियो अपन-अपन पानि नुका लेने छथि'
एहने एकटा आओर काव्यांश देखल जाओ-
'प्रेममे सभ किछु भेटत
मुदा प्रेम नहि एहि कलयुगमे'
स्त्रीक स्वातंत्र्यक पक्षधर कवियित्री अपन कविता में पुरूष मानसिकताक विकृतिकेँ अपनहि अंदाजमे चेतौनी दैत भेटै छथि-
'स्त्रीक मान
पुरूषक अभिमान
संगे चलै त' अति उत्तम'
सामाजिक विद्रुपतापर कुठाराघात करैत कवियित्रीक ई छोट कांतिक कविता देखल जाओ-
'गाछक ठाढ़िमे
टाँगल वा लटकल
दू संदर्भमे अर्थ दैत छैक
कतेक सहज भ' गेल अछि
जिनगी उतारब
की चढ़ायब
निर्णय
समाजक स्वघोषित
सर्वशक्तिमानक हाथमे'
ओतहि जखन कवियित्री प्रेममे बिसनभोर भ' नारी मोनक सेहन्ता कवितामे रखै छथि, त' सौंदर्यक एकटा अजगुत दृश्य खुजैत अछि-
'दुनियाक प्रत्येक स्त्री चाहैत छथि जे
उतारय हुनक प्रियतम
कोनो कल्पनामे हुनका
जिनगीमे एकबेर अवश्य'
शेखर प्रकाशनसँ प्रकाशित जमा 130 पृष्ठक एहि संग्रहक कविता सभमे तन्नुक
हियकेर भावना यथार्थवादिताक संग सोझा आयल अछि. हं, पोथीमे शीर्षकक 6 गोट
सीरीज कविता संकलनकेर अछैतो एहि संग्रहमे ओतबो 'मणिकर्णिका' नहि आयल अछि,
जतबा प्रथम दृष्टया बनारसक अंगनइमे अछि. से हमरा अखरल.
अस्तु, एहि
कवियित्रीसँ मैथिली साहित्यकेँ बड़ बेसी आस छैक. उमेद जे हिनक अगिला डेग
आओर बेसी समधानल आ सशक्त भ' सोझा आओत. सुधि पाठककेँ ई संग्रह पढ़बाक चाही.
अंतमे निवेदिता जीकेँ बधाइ ओ शुभकामना 💐
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