मैथिली लोरी : सुता देबें की बौआकेँ बाज रौ


 

चान  अढ़बै   छियौ  तोरा  काज  रौ
सुता  देबें   की,   बौआकेँ   बाज  रौ

देख  फूलक  बिछौना  सजा देने छी
तैपर मसलङ  तूरक   लगा  लेने छी
आबि   सिरहन्नामे   बस  विराज  रौ
सुता देबें की...

हमर बौआक  चन्ना  रौ  मामा  तोंही
छें ओकरा लए बड़का कलामा तोंही
चलि  आबै  चढ़ि   हवा   जहाज  रौ
सुता देबें की...

जुनि  अगधो  एना  बात  मानै  हमर
झट्ट  नीच्चा  उतर  तोँ   बीतलै  पहर
संग  लाबै  अपन    तारा  समाज  रौ
सुता देबें की...
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✍️ अक्षय आनन्द सन्नी

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