मैथिली गजल : बुझू लुत्ती करेजमे डेबि रहल छी

 



मरछाउरमे   जिनगी   हम   टेबि  रहल  छी
बुझू    लूत्ती    करेजमे    डेबि    रहल   छी

बगदल   समय   रान्हि    रहलै   अरगासन
कनमा - कनमा  साँस  बस  सेबि रहल छी

मुसकि  रहल   सारा   पर  नन्हकी  तुलसी
हम  समाजकें   अदंकसँ  लेबि   रहल  छी

कमलेसरीक    उछाहमे     भासल   घराड़ी
नाह  बन्हकी  पड़ल  प्राण  खेबि  रहल छी

भरोसक    माटि    पर    प्रेम   जे   फौदेलै
नियति अपना बमोजिम हम छेबि रहल छी
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✍️ अक्षय आनन्द सन्नी

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