मैथिली नचारी : गंगाजलमे डूबेलियै यौ ना...

 

यौ बाबा कोन अपराधक, सजा एहन अहां देलियै यौ
गंगाजलमे डूबेलियै यौ ना...

टूटल जिनगीमे विपतिकें बान्ह,
भासल सभटा हर्षक धान.
छिरिया जटा किए नै, भगीरथी धार रोकलियै यौ
गंगाजलमे डूबेलियै यौ ना...

दुक्ख देखि झहड़ए दुहू नयन,
मिथिला लेलक यौ जलशयन.
संतति मैथिल सभकें, एना किए कनेलियै यौ
गंगाजलमे डूबेलियै यौ ना...

उब-डुब करैए अक्षय प्राण,
डूबल मोनक खेत-खरिहान.
गंगकें भंग पिया कऽ, तांडव अहां देखेलियै यौ
गंगाजलमे डूबेलियै यौ ना...

एखनो छै बान्हल अहीं सऽ आस,
असह भेलै बाबा ई त्रास.
उबारू आबो तऽ दानी, विपदा बहुत सहलियै यौ
गंगाजलमे डूबेलियै ना...

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