मैथिली गीत : धर ने धीरज अपनो बिहान होतै गे
पढ़तै लिखतै कंटिरबा बबुआन होतै गे
धर ने धीरज अपनो बिहान होतै गे
१.
धुँअ'लौ जे भीजल ख'ढ़ नाहित जिनगी
पजरि ज'तौ ताहिमे गे आसक चिनगी
फेनू हरखक कोनो नै ठेकान होतै गे
धर ने धीरज.......
२.
दिन-सुदिन भेलौ जहिया तू जनिहे
पोछ आइ आँखि तू ओहि दिनमा कनिहे
लोर मुसकीक गजबे मिलान होतै गे
धर ने धीरज.........
३.
टलहा ई सभटा बदलि ज'तौ सोनमे
गेनाके थोका फूलेतौ जे मोनमे
सौख सपनाके नहिंए सीमान होतै गे
◼️
✍️ अक्षय आनन्द सन्नी
धर ने धीरज अपनो बिहान होतै गे
१.
धुँअ'लौ जे भीजल ख'ढ़ नाहित जिनगी
पजरि ज'तौ ताहिमे गे आसक चिनगी
फेनू हरखक कोनो नै ठेकान होतै गे
धर ने धीरज.......
२.
दिन-सुदिन भेलौ जहिया तू जनिहे
पोछ आइ आँखि तू ओहि दिनमा कनिहे
लोर मुसकीक गजबे मिलान होतै गे
धर ने धीरज.........
३.
टलहा ई सभटा बदलि ज'तौ सोनमे
गेनाके थोका फूलेतौ जे मोनमे
सौख सपनाके नहिंए सीमान होतै गे
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✍️ अक्षय आनन्द सन्नी
नोट- ई गीत क्लिक छूबि सुनल जा सकैए


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