मैथिली लोरी : चान आनि देब झोरा मे
कनै छी किए, सूति रहू ने
बौआ मम्मीक कोरामे
चान आनि देब झोरामे
तारा सभ फूलतोरामे
चन्ना मामाके संग अहाँ
खेलैत खेलैत भोर करू
लिअ इजोरिया अपन मोनकेँ
बौआ झट दऽ गोर करू
तागि देब हम, सभटा तारा
नूनू अहाँक हिलोरामे
निनिया रानीके संग अहाँ
सपन लोकमे बूलि लिअ
बनिकऽ चिड़ैया पाँखि पसारू
बदरीपर जा झूलि लिअ
फूल कहैए, मुसकी सीखब
बैसल अहीँक नेहोरामे
उड़नखटोला मेघसँ एतै
मुरही लाइ खसेतै
बौआ हमर धुथरीमे भरि
लपे - लपे खेतै
लालपरी देति, अहाँकें बेटू
दूध बगिया कटोरामे
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बहुत सुन्दर
जवाब देंहटाएंकतेक नीक रचना
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