मैथिली बाल कथा : मिठ्ठू (Miththu)


हमरा गामक धनेसर बाबा एकटा सुग्गा पोसने छलाह. जकर नाम मिठ्ठू छलैक. मिठ्ठू धनेसर बाबा स' अनमन मनुक्ख जकां गप्प करैत छल. जे देखि लोककें चकित होएब स्वभाविक छलै . मिठ्ठू अपन मिठ्ठ बोल सऽ सभकें सहजहिं अपना दिस आकर्षित क' लैत छल. धनेसर बाबाकें त' प्राणे मिठ्ठूमे बसैत छल. ओ एकहु क्षण लेल मिठ्ठूकें आंखिक स' दूर नै होमए दैत छलाह. बाबा निजदिन अपनहि संग मिठ्ठूकें स्नान आ भोजन करबैत छलाह.
         एक दिन बेरू पहर बाबा दलानक कोठलीमे अलसा क' पड़ल छलाह कि तखनहि बाहर दलान पर एकटा करोड़िया भीख लेल टाहि देलक. करोड़ीक टाहि सुनि बाबा कोठली स' बहार होइतथि कि ओहि स' पहिने ओरियानीमे टांगल पिंजरा स' मिठ्ठू जवाब द' देने छल- "की छै".?
करोड़िया अकचकाइत मिठ्ठू दिस तकलक आ सुग्गाकें मनुक्ख जकां बजैत देखि गुम भ' गेल.
"की काज अछि, बाजू"- मिठ्ठू पुन: टेरलक.
"भीख चाही"- प्रत्युत्तरमे करोड़िया बाजल जरूर. मुदा सुग्गाकें एना सवाल-जवाब करैत देखि ओकरा ठकमुड़ी सन लागि गेलै. ओकरा अपने आँखि पर भरोस नै भ' रहल छलैक.
"बाबा एखन सूतल छथि. जाउ, दोसरा घड़ी आएब"- पुनि मिठ्ठूक ई मधुरगर स्वर ओकर तन्द्रा तोड़लक. तत्पश्चात करोड़िया बाबाक दलान स' घूरि त' गेल.
       एम्हर कोठली स' ई सभ सुनि धनेसर बाबाक ठोर पर  सहजहिं मुसकि छिहलि गेलनि त' ओम्हर मिठ्ठू ओहि करोड़ियाक मोन मोहि लेने छल. मिठ्ठूकें निधोख बजैत देखलाक बाद स' करोड़ीक दिमागमे आब एकहि टा बात नचै छलै जे कहुना ई सुग्गा हाथ लागि जाए. फेर त' लोककें तमाशा देखा बैसले पाइ कमाएब. आब ओकर मांथ सुग्गा चोरएबाक ब्योंतमे अपस्यांत छल.
   राति होइते करोड़ी फेर धनेसर बाबा ओतए आएल आ अन्हरियाक अ'ढमे पिंजरा सहित सुग्गाकें गायब क' देलक. मिठ्ठू अन्हारमे करोड़ियाकें देखि त' नै सकल. धरि "चोर-चोर" चिचियाएल अवश्य छल. मुदा, निशाभाग राति भेलाक कारणें बाबाक आंखि लागि गेल रहनि आ ओ किछु नै बूझि सकलाह.
     भोर होइते सगर गाममे बाबाक सुग्गा चोरि होएबाक बात जंगलक आगि जकां पसरि गेल. बाबा सहित पूरा गाम दुखित छल. कारण, मिठ्ठू स' सभहक लगाव जगजियार छलैक. एम्हर बाबा मिठ्ठू के तकतियानमे गाम स' बाध-बोन धरि छान मारि लेलाह. मुदा ओ कतौ नै भेटल.
      की तखनहि बाबाकें ओ करोड़िया मोन पड़ल आ झट्ट द' गामक लोक सभहक संग ओ हाट पर पहुंचलाह. जतए करोड़िया सभ डेरा खसओने छल. गामक मुखिया जी करोड़िया सभ स' सुग्गा चोरि होएबाक बात कहि सुनौलनि. मुदा करोड़िया सभहक सरदार चोरि करबाक बात स' ई कहैत मुकरि गेल जे हमरा लोकनि मांगि-चांगि क' जिनगी काटै छी चोरि नै करै छी सरकार. कारण, सरदार कें बूझल छलैक जे ओकरा समुदायमे एकटा चोर सेहो अछि.
मुखिया जी के सरदारक गप्प पर विश्वास नै भेल ओ अपन गौंआ सभकें करोड़िया सभहक मड़ैयाकें तलाशी लेबाक लेल कहलाह.
ई सुनि धनेसर बाबा बजलाह- "तलाशी लेबाक आवश्यकता नै छैक, ज' एकरा सभ ल'ग हमर मिठ्ठू होएत त' बिनु तलाशी भेटि जाएत".
"से कोना"- गामक लोक पुछलक
"मिठ्ठू छें रौ..."- बाबा जोर स' शोर केलनि.
बाबाक स्वर सुनि मड़ैयाक भीतर स' मिठ्ठू बाजल- "बचाउ यौ बाबा, हम एत' छी".
आब करोड़ीक सरदारकें लाज स' मांथ झुकि गेल छल. मिठ्ठूकें मड़ैया स' बहार क' बाबाकें सौंपि देल गेल आ करोड़ी चोरकें ओकर सरदार समाज स' निकालि दण्डित केलक. बाबा अपन मिठ्ठूक संग गामक बाट ध' लेने छलाह.

✍️ अक्षय आनन्द सन्नी

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