भगवती गीत : लुकझुक करैए आब, जिनगीक आस गे
विपतिकेर बिहाड़ि मैया उड़ेलकौ हदास गे
लुकझुक करैए आब, जिनगीक आस गे
विपतिकेर बिहाड़ि मैया.....
साओन-भादो भेल नैन, झहड़ौ दिन-राति माँ
कज्जी छै तोरा बिनु, मनुक्खक ओकाति माँ
खगले जे मुसकी नियति, टेकलक उपास गे
लुकझुक करैए आब, जिनगीक आस गे
विपतिकेर बिहाड़ि मैया.....
संतति सकदम भेल माँ , करै छौ खेखनियाँ
तोँ जँ नहि तकबें जननी, उनटि जेतै दुनियाँ
भासल जाइए सभटा माँ, हरखक चास गे
लुकझुक करैए आब, जिनगीक आस गे
विपतिकेर बिहाड़ि मैया.....
समय-साल काल-कण्टक, तोंही अवलम्बे
जगतकेर कष्ट तोँ, हरै जगदम्बे
आशीष अक्षय दए बस, मोनमे कर वास गे
लुकझुक करैए आब, जिनगीक आस गे
विपतिकेर बिहाड़ि मैया.....
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भाव सँ पोर-पोर भरल आखर👌
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