भगवती गीत : लुकझुक करैए आब, जिनगीक आस गे

 

विपतिकेर बिहाड़ि  मैया  उड़ेलकौ  हदास  गे
लुकझुक   करैए   आब,   जिनगीक आस  गे
विपतिकेर बिहाड़ि मैया.....

साओन-भादो भेल नैन,  झहड़ौ दिन-राति माँ
कज्जी छै तोरा बिनु, मनुक्खक  ओकाति माँ
खगले जे मुसकी नियति,  टेकलक  उपास गे
लुकझुक  करैए    आब,  जिनगीक  आस  गे
विपतिकेर बिहाड़ि मैया.....

संतति सकदम  भेल  माँ , करै छौ खेखनियाँ
तोँ जँ नहि तकबें  जननी, उनटि  जेतै दुनियाँ
भासल जाइए  सभटा  माँ,  हरखक  चास गे
लुकझुक करैए   आब,   जिनगीक  आस  गे
विपतिकेर बिहाड़ि मैया.....

समय-साल  काल-कण्टक,   तोंही  अवलम्बे
जगतकेर     कष्ट     तोँ,      हरै      जगदम्बे
आशीष अक्षय  दए  बस, मोनमे कर वास गे
लुकझुक  करैए    आब,  जिनगीक  आस गे
विपतिकेर बिहाड़ि मैया.....
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