मैथिली कविता : ऑक्सीजन


एकटा रोगियाह बसातकेँ
आइ-काल्हि चढ़ल छै उमकी
उड़ा देने अछि सभक हदास

लहासक काँड़ माझ
नंगो-चंगो भेल जिनगी
बिसरि गेल अछि जीबाक अवगति

उखी-बिखी लागल छैक
लोकतंत्रक चारिम खाम्हकेँ
अगबे डरक बएन बाँटि रहल अछि घरे-घर

एक-दोसराक उखाहीमे
लागल अछि राजनीति
ईमानदारीसँ क' रहल अछि अपन काज

बेईमान भेल छैक लोकक साँस
छोड़ि रहलैक अछि बीचहि बाटमे संग
हारि रहल अछि लोक मृत्युसँ जंग

मुदा,
हमरा हारबाक नहि अछि मीत
एखन नहि धुकचुकायल अछि हमर कलम
लिखबाक अछि सभसँ पैघ कविता
जुगता रखने छी अपना हिस्साक
किछु मोसि, बसात सेहो
से, बसात निंघटबासँ पहिने
हम दानमे देबय चाहै छी किछु साँस
मिरतुक भेल सरकारी व्यवस्थाकेँ
ऑक्सीजनक अभावमे
चलि रहलैक अछि उपरे-उपर साँस जकर
छवि साभार- गूगल

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