गजल : अजबारल छौ तोहर करेज, हमरा कनेटा ठेकाना चाही




चान   छै,  प्रेम   छै,   मिसिये    भरि   बस    बहाना   चाही
अजबारल  छौ  तोहर  करेज,  हमरा  कनेटा  ठेकाना चाही

तोँ चानन,  हम  चननकाठी,  चल  छीटै  छी  सुगंधि  नेहक
छोड़ दुनियाक फिकिर,  दुनिया  सिकारी  छै निशाना चाही

देह   दूटा,   देश   मानल,    मोन    एकहिटा    विश्व   थिक
सकबेधल बाघा सन नै,   जटही  जिनगीक  सीमाना  चाही

औंघा    रहलैए,    देश    अपन,    राजनीतिकेर    लोरीपर
फोँफ काटय लेल सत्ताकेँ,  बस भोट भरल सिरहाना चाही

बाट  परहक,   ढेप   नियति,   हिआओ   ठेकल  पहाड़  छै
छेकि सकय आकास समुच्चा, तेहने कोनो समियाना चाही

✍️ अक्षय आनन्द सन्नी

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