नचारी : विनय मोर सुनियौ यौ दानी



विनय मोर सुनियौ यौ दानी, विनय मोर सुनियौ यौ दानी
कानैत - कानैत  नोर  सुखायल,-2 आओर कतेक कानी
विनय मोर....
१.
करूणानिधि छी  अहाँ बाबा,  शिव  यौ  अहीं  त्रिलोचन
कालक फांसमे  ओझरायल जग,  तकियौ पाशविमोचन
अछिया सगरो धधकि रहल छै,-2 आबि मिझाबू मसानी
विनय मोर....
२.
पाहिमाम्    हुकरैए    धरती,    सूतल    अहाँ    कैलाशे
जिनगीक  भदवा   टारु  भोला,   तागल   अहींसँ  आशे
शरण चरण पड़ि  नित गोहराबी-2 हम  बालक  अज्ञानी
विनय मोर....
३.
माँगी किछु नहि  हम यौ शंभू, भसकल नियतिके गोड़ा
अक्षय  हो  संसार   ई   बाबा,   एतबहि   करी   निहोरा
छी  अपाटक  अहींकेर   संतति-2  माफ  करू नादानी
विनय मोर....

✍️ अक्षय आनन्द सन्नी

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