नचारी : बाबा हो बोइनमे जग कल्याण चाही हो...


दूभि-बेलपातो  खोंटै छी,
भोरे गहबर हम नीपै छी
तोँ गिरहथ हम ज'न, हमरा दान चाही हो
बाबा  हो बोइनमे, जग कल्याण चाही हो
१.
सुतैत-उठैत  सुमिरन केलियह,
कहियौ  किछु  नहि मंगलियह
आँखि मुनि  तोँ  पड़ले रहलह,
धूपो    -    दीप     देखेलियह
मोन थर-थर खूब करैए, ई  समय - साल  डेरबैए.
आब लगैए उनटत दुनिया,  तोहर ध्यान चाही हो
बाबा हो बोइनमे, ........
२.
थाकल छी  हो  पार  लगाबह
भोला        प्राण      बचाबह
हुकरि रहल छै सभक जीवन
आओर   ने   आब   कनाबह
बाबा बचा लहक संसारे, करह मुद्दैके तों संहारे
छै छेकने  काल  धुरखुर, एहिसँ  त्राण चाही हो
बाबा हो बोइनमे, .........
३.
तों   शंकर,   तों   अन्तर्यामी,
तीनू        लोकक      स्वामी
सकल जगतमे कह' ने के छै,
तोरा    सन     हो    कलामी
सभ अक्षय नेहक भूखल, शिव कह' किए तों रूसल
गुम्मी   लधने   कलपैत   नै,   ई   जहान   चाही   हो
बाबा हो बोइनमे, .........
✍️ अक्षय आनन्द सन्नी

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